भूमिका रायगढ़ में विकास और भूमि अधिग्रहण की नई दिशा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाल ही में भूमि अधिग्रहण एवं सार्वजनिक सुनवाई से संबंधित कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गई हैं। यह घोषणाएँ जिले के विकास, औद्योगिक विस्तार और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई हैं। हालाँकि, इन घोषणाओं के साथ किसानों और स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं — कुछ ने इसे विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कुछ ने चिंता जताई कि इससे कृषि भूमि और आजीविका पर असर पड़ेगा।
रायगढ़ के भूमि अधिग्रहण एवं सार्वजनिक सुनवाई घोषणाएँ — विशेषकर टिनमिनी गाँव आदि में भूमि अधिग्रहण के बारे में नोटिस प्रकाशित। raigarh.gov.in
भूमि अधिग्रहण की प्रमुख परियोजनाएँ

रायगढ़ जिले में जिन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है, उनमें प्रमुख हैं:
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जिंदल पावर एंड स्टील लिमिटेड की विस्तार परियोजना – इस परियोजना के लिए लैलुंगा और घरघोड़ा क्षेत्र में लगभग 300 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है।
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रेल लाइन कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट – रायगढ़ से बारनापारा तक नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए भूमि चिन्हित की गई है, जिससे औद्योगिक उत्पादों का परिवहन सुगम होगा।
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राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) का इंडस्ट्रियल एरिया विस्तार – कोतरैली और नवापारा क्षेत्र में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण अधिसूचना जारी की गई है।
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राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना – रायगढ़–खरसिया–सारंगढ़ मार्ग के चौड़ीकरण हेतु भूमि चिन्हित की गई है।
सार्वजनिक सुनवाई नागरिकों की राय और सवाल
सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय और पर्यावरण विभाग की देखरेख में आयोजित की गई।
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किसानों की चिंता: ग्रामीणों ने अपनी उपजाऊ भूमि जाने पर चिंता जताई। उनका कहना था कि भूमि के बदले मिलने वाला मुआवज़ा पर्याप्त नहीं है।
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युवाओं की उम्मीदें: कुछ युवाओं ने कहा कि नई परियोजनाओं से रोजगार के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य व परिवहन सुविधाएँ बढ़ेंगी।
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पर्यावरण कार्यकर्ताओं की राय: पर्यावरणविदों ने चेताया कि औद्योगिक विस्तार से जंगल और जल स्रोतों पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए परियोजना शुरू करने से पहले विस्तृत पर्यावरणीय सर्वेक्षण जरूरी है।
कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक कदम
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया “राइट टू फेयर कम्पनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विज़िशन एक्ट, 2013” के तहत की जा रही है।
प्रशासन ने बताया कि
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प्रभावित परिवारों को बाज़ार मूल्य से चार गुना तक मुआवज़ा दिया जाएगा।
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विस्थापित परिवारों को पुनर्वास नीति के तहत आवास, रोजगार और शिक्षा के अवसर प्रदान किए जाएँगे।
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पर्यावरण स्वीकृति के लिए सभी परियोजनाओं को मंत्रालय से मंजूरी लेनी होगी।
स्थानीय नेताओं और संगठनों की प्रतिक्रिया
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कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अपने-अपने पक्ष रखे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार को पहले जनता की सहमति सुनिश्चित करनी चाहिए, जबकि बीजेपी नेताओं ने कहा कि विकास परियोजनाओं को रोकना नहीं चाहिए।
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किसान संगठन जैसे कि “छत्तीसगढ़ किसान मंच” ने अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित मूल्य निर्धारण की मांग की है।
विकास के साथ संतुलन की चुनौती
रायगढ़ पहले से ही औद्योगिक रूप से समृद्ध जिला है, लेकिन यहां पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमि अधिग्रहण के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों का ध्यान रखा जाए, तो यह कदम जिले के लिए दीर्घकालिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
किसानों के लिए राहत उपाय
सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए कुछ विशेष योजनाओं की भी घोषणा की है:
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मुआवज़े के साथ कौशल विकास प्रशिक्षण – ताकि प्रभावित परिवार के सदस्य नई नौकरियों के योग्य बन सकें।
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कृषि भूमि के बदले में आवासीय भूमि – ग्रामीणों को पुनर्वास कॉलोनी में जमीन दी जाएगी।
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शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ – परियोजना क्षेत्र के नज़दीक स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जाएँगे।
जनता की भागीदारी लोकतांत्रिक दृष्टिकोण
सार्वजनिक सुनवाई केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी का प्रतीक है।
इससे प्रशासन को यह जानने में मदद मिलती है कि जनता विकास परियोजनाओं के प्रति क्या सोचती है और किस प्रकार के सुधार अपेक्षित हैं।
भविष्य की दिशा और संभावनाएँ
रायगढ़ में भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ, सरकार भविष्य में सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में कार्य करने की योजना बना रही है।
राज्य का लक्ष्य है कि 2030 तक हर औद्योगिक परियोजना में 25% “ग्रीन ज़ोन” शामिल किया जाए।
संतुलित विकास की ओर कदम
रायगढ़ की भूमि अधिग्रहण और सार्वजनिक सुनवाई घोषणाएँ यह दर्शाती हैं कि राज्य विकास की नई दिशा में अग्रसर है।
हालाँकि चुनौतियाँ कई हैं — किसानों की चिंता, पर्यावरणीय खतरे और पारदर्शिता की मांग — लेकिन यदि प्रशासन सभी पक्षों को साथ लेकर चले, तो यह प्रक्रिया विकास और जनहित दोनों के लिए लाभकारी साबित होगी।
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